शादी एक खाई है

शादी एक खाई है सही पत्नी न मिले तो जीवन नर्क हो जाती है ।

मोहब्बत को तौला नही जाता, 
नसीब से पूछा नहीं जाता , 
इजहार रे मोहब्बत तुम से है सिर्फ, 
क्योंकि दूसरो से मोहब्बत बाटा नही जाता।

तुम्हारा साथ जैसे पत्थर की लकीर हो।
जब से मिली हो फकीर हो गया हूं।

वो तब तक अच्छा या अच्छी है जब तक हम उसकी सच्चाई नही जानते।
मत कर गुमान इतना ये उम्र है ढल जायेगा,
क्योंकि सुबह होती ही है इसलिए की साम हो सके।

मिलने के बाद जो याद करे वो मुसाफिर नही तो क्या है,
मुसाफिर भी अपने हो जाते है जो एक बार मिल के भी ताउम्र याद रखते है।

खैर अपना कोई नहीं, और बेगाने हम नहीं।

सुखे पत्ते से पूछो सुखने का दर्द
टूटे दिल से पूछो प्यार का दर्द
देखो तो सब मोह माया है
किरदार तो अपना सब से बेगाना है।

अल्फ़ाज़ भी खत्म हो गई खत्म हो गई इंतजार
फिर भी न जाने क्या खो गया और क्या मिला
इंतजार ये मोहब्बत का दस्तूर बिखर गया।


Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.