लौट आ तू

लौट आ तू यूं तन्हा न छोड़, हो के तू मेरा यूं बेगाना न हो,
जा ये मोहब्बत जी ले तू जिंदगी खैरात की ,
बसुलने आऊंगा बन के बाराती तेरे सुहाग की,
खेलूंगा गोद में तेरी बन के तेरा चांद,
फिर मोहब्बत का दस्तूर भी बदल जाएगा और रिश्ता भी।

------- ABHAY

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