रखल करा करेजा में साट के ये गोरी

रखल करा करेजा में साट के ये गोरी , न त भुला जाएब ऐशन कोना में, डिबिरी बार के भी खोजबु न तबहुं न भेटेब, अंखियां पथरा जाई खोजत खोजत, फुल के गेंदा के जब फुल हो जयबू, केहू न पूछी जब केसिया तोहार बकरी के पुंछ हो जाई।

अभय कुमार 

खो गया हु ऐसा खामोशी में, फासला भी पता न चले ये दिलरुबा , रूह भी काप जाती है तेरे साथ रह के बर्तन मांजने में।
- अभय कुमार

बस तेरी याद बाकी है सिने में, दफन हो जाऊ तेरी यादो के सहारे तु खोजती रहे मुझे तंग गलियों में, जब न दिखु तो अपनी आंखे बन्द कर मुझे ढूंढ़ना अपने सीने में, दफन मिलूंगा किसी एक कोने में।
- अभय कुमार

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