मालुम नही था इस तरह मिलोगी

मालुम नही था इस तरह मिलोगी, इस कदर हो जायेगा प्यार,
देख के तुम्हे आता है प्यार वे सुमार, 
खोने का डर सताता है हर दम, 
जी चाहता है पास बैठ के देखता रहूं तेरी आंखों में हरदम,
कभी गले से लगाऊं तो कभी करू बेइंतहा प्यार, 
तुम्हे लगता है नही कोई प्यार, 
लेकिन मैं दिखाना नही चाहता ताकि न हंसे संसार, 
तेरी नफरत में भी प्यार दिखता मुझे और तेरी लबों पे बस मेरा नाम। 
चाहता रहूं मैं तुम्हे हर दम यही है मेरा प्यार। 
उम्र के किसी भी मोड़ पे नही भूलूंगा तुम्हारा प्यार, 
जो दिया तुमने मुझे खुशियां हजार।

--अभय

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